आपके अधिकार
मेरे स्त्रीधन (शादी के तोहफ़ों) पर मेरा क्या अधिकार है?
छोटा जवाब
स्त्रीधन पूरी तरह पत्नी का होता है। पति या ससुराल वालों का उस पर कोई हक नहीं है। उसका दुरुपयोग आपराधिक अपराध है।
मामले को समझें
स्त्रीधन में वह सारी चल और अचल संपत्ति शामिल है जो किसी महिला को शादी से पहले, शादी के दौरान या शादी के बाद मिली हो — माता-पिता, रिश्तेदारों, दोस्तों, पति के परिवार और खुद पति से मिले तोहफ़े। इसमें गहने, नकद, संपत्ति और दूसरी कीमती चीज़ें शामिल हैं। इस पर महिला का पूर्ण स्वामित्व होता है और वह अपनी मर्ज़ी से इसका इस्तेमाल कर सकती है। अगर पति या ससुराल वाले उसके स्त्रीधन को अपने कब्ज़े में ले लेते हैं, तो इसे सौंपी गई अमानत माना जाता है, और उसका दुरुपयोग BNS धारा 316 के तहत आपराधिक विश्वासघात है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रतिभा रानी बनाम सूरज कुमार (1985) में साफ़ तौर पर तय किया कि स्त्रीधन पत्नी की एकमात्र संपत्ति रहता है और पति का उस पर कोई हक नहीं है।
लागू कानून
- हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम — स्त्रीधन से जुड़े प्रावधान
- BNS धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात)
- प्रतिभा रानी बनाम सूरज कुमार (1985) — स्त्रीधन पर सुप्रीम कोर्ट