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आपके अधिकार

अगर बिज़नेस पार्टनर मुझे धोखा दे तो मेरे क्या अधिकार हैं?

छोटा जवाब

धोखेबाज़ बिज़नेस पार्टनर के खिलाफ आप आपराधिक केस (धोखाधड़ी, विश्वासघात) और दीवानी मुकदमा (भंग, हिसाब, वसूली), दोनों दायर कर सकते हैं।

मामले को समझें

भारतीय भागीदारी अधिनियम के तहत हर पार्टनर पर भरोसे की ज़िम्मेदारियां हैं, जिनमें ईमानदारी, सच्चा व्यवहार और सही हिसाब देना शामिल है। अगर आपका पार्टनर धोखा दे: (1) BNS धारा 316 (आपराधिक विश्वासघात) और धारा 318 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज करें, (2) पार्टनरशिप भंग करने और सही हिसाब के लिए दीवानी मुकदमा दायर करें, (3) पार्टनर को पार्टनरशिप की संपत्ति बेचने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा के लिए आवेदन करें, (4) पार्टनर की धोखाधड़ी से हुए नुकसान का हर्जाना मांगें, (5) अगर पार्टनरशिप डीड में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ है, तो आर्बिट्रेशन शुरू करें। रजिस्टर्ड पार्टनरशिप डीड से आपका केस काफ़ी मज़बूत होता है। डीड न होने पर भी आप व्यवहार, बैंक खातों और टैक्स रिटर्न से पार्टनरशिप साबित कर सकते हैं। धोखाधड़ी करने वाले पार्टनर को व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदार ठहराया जा सकता है।

लागू कानून

  • भारतीय भागीदारी अधिनियम — धारा 9, 12-15 (पार्टनरों के कर्तव्य)
  • भारतीय भागीदारी अधिनियम — धारा 44 (अदालत द्वारा भंग)
  • BNS धारा 316 — आपराधिक विश्वासघात
  • BNS धारा 318 — धोखाधड़ी
  • भारतीय संविदा अधिनियम — धारा 73, 74 (हर्जाना)