आपके अधिकार
क्या पुलिस मुझे हथकड़ी लगा सकती है?
छोटा जवाब
आमतौर पर नहीं। हथकड़ी लगाना तब तक मना है, जब तक व्यक्ति खतरनाक या हिंसक न हो या उसके भागने की आशंका न हो। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर सख्त दिशानिर्देश जारी किए हैं।
मामले को समझें
सुप्रीम कोर्ट ने प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन मामले में माना कि हथकड़ी लगाना अमानवीय और अनुचित है और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है। पुलिस किसी व्यक्ति को सिर्फ़ असाधारण परिस्थितियों में ही हथकड़ी लगा सकती है — जैसे व्यक्ति हिंसक या खतरनाक हो, या उसका भागने का इतिहास हो। अधिकारी को हथकड़ी लगाने के कारण लिखित में दर्ज करने होंगे। सभी गिरफ़्तार व्यक्तियों को नियमित रूप से हथकड़ी लगाना गैरकानूनी है। अगर आपको बिना उचित कारण हथकड़ी लगाई जाती है, तो आप शिकायत दर्ज कर सकते हैं और अपने मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के लिए अदालत से मुआवज़ा मांग सकते हैं।
लागू कानून
- प्रेम शंकर शुक्ला बनाम दिल्ली प्रशासन (1980) — हथकड़ी से जुड़े दिशानिर्देश
- BNSS धारा 36 — गिरफ़्तारी की प्रक्रिया
- अनुच्छेद 21 — गरिमा का अधिकार