आपके अधिकार
क्या नियोक्ता मुझे इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर कर सकता है?
छोटा जवाब
नहीं। ज़बरदस्ती इस्तीफ़ा दिलवाना परोक्ष बर्खास्तगी है और गैरकानूनी है। दबाव डाला जाए तो किसी चीज़ पर साइन न करें। दबाव का रिकॉर्ड रखें और श्रम आयुक्त के पास शिकायत दर्ज करें।
मामले को समझें
नियोक्ता आपको इस्तीफ़ा देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। अगर नियोक्ता धमकी, उत्पीड़न, पदावनति या शत्रुतापूर्ण माहौल बनाकर इस्तीफ़े का दबाव डालता है, तो यह परोक्ष बर्खास्तगी (constructive dismissal) है और इसे गैरकानूनी बर्खास्तगी माना जाता है। अगर आप पर दबाव डाला जा रहा है: किसी इस्तीफ़े पर साइन न करें; दबाव के हर मामले का रिकॉर्ड रखें (ईमेल, मैसेज, गवाहों के नाम); HR को लिखित शिकायत दें; HR मदद न करे तो श्रम आयुक्त के पास शिकायत दर्ज करें या औद्योगिक विवाद उठाएं। आप बहाली, बकाया वेतन और मुआवज़ा मांग सकते हैं। अदालतों ने लगातार कहा है कि ज़ोर-ज़बरदस्ती या अनुचित दबाव से लिया गया इस्तीफ़ा स्वैच्छिक नहीं है और रद्द किया जा सकता है।
लागू कानून
- औद्योगिक विवाद अधिनियम — परोक्ष बर्खास्तगी
- वेतन संहिता
- भारतीय संविदा अधिनियम — धारा 15-16 (ज़ोर-ज़बरदस्ती और अनुचित प्रभाव)