आपके अधिकार
क्या पुलिस को अरेस्ट मेमो बनाना होगा?
छोटा जवाब
हां। पुलिस को गिरफ़्तारी की तारीख, समय और जगह के साथ अरेस्ट मेमो बनाना होगा, जिस पर गवाह के हस्ताक्षर हों। सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार यह अनिवार्य है।
मामले को समझें
सुप्रीम कोर्ट ने D.K. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य मामले में कहा कि हर गिरफ़्तारी के समय अरेस्ट मेमो बनाना होगा। इस मेमो में गिरफ़्तारी की तारीख, समय और जगह होनी चाहिए, और कम से कम एक गवाह के हस्ताक्षर होने चाहिए, जो गिरफ़्तार व्यक्ति के परिवार का सदस्य या इलाके का कोई सम्मानित व्यक्ति हो सकता है। अरेस्ट मेमो की कॉपी गिरफ़्तार व्यक्ति को देनी होगी। मेमो में गिरफ़्तार करने वाले अधिकारी का नाम और पद भी होना चाहिए। इस शर्त का पालन न करने पर विभागीय कार्रवाई हो सकती है और यह हिरासत की वैधता को चुनौती देने का आधार बन सकता है।
लागू कानून
- D.K. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) — अरेस्ट मेमो की शर्त
- BNSS धारा 36 — गिरफ़्तारी की प्रक्रिया