आपके अधिकार
क्या नियोक्ता मातृत्व अवकाश देने से मना कर सकता है?
छोटा जवाब
नहीं। मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत हर महिला कर्मचारी पहले दो बच्चों के लिए 26 हफ़्ते के सवेतन मातृत्व अवकाश की हकदार है।
मामले को समझें
मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (2017 में संशोधित) पहले दो बच्चों के लिए 26 हफ़्ते और तीसरे बच्चे से आगे 12 हफ़्ते का सवेतन मातृत्व अवकाश अनिवार्य करता है। यह 10 या ज़्यादा कर्मचारियों वाले हर प्रतिष्ठान पर लागू होता है। मुख्य अधिकार: (1) छुट्टी के दौरान पूरा औसत दैनिक वेतन, (2) मातृत्व अवकाश के दौरान नौकरी से नहीं निकाला जा सकता — यह धारा 12 के तहत आपराधिक अपराध है, (3) 6 हफ़्ते की छुट्टी डिलीवरी से पहले ली जा सकती है, (4) गर्भावस्था से जुड़ी बीमारी के लिए एक महीने की सवेतन छुट्टी का हक, (5) बच्चे के 15 महीने का होने तक रोज़ स्तनपान के लिए दो ब्रेक, (6) 50+ कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों में क्रेच सुविधा अनिवार्य। गोद लेने वाली और कमीशनिंग मांओं को भी 12 हफ़्ते की छुट्टी मिलती है। अगर नियोक्ता मातृत्व अवकाश से मना करे, तो श्रम निरीक्षक या ज़िला श्रम आयुक्त के पास शिकायत दर्ज करें।
लागू कानून
- मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 — धारा 5 (26 हफ़्ते की सवेतन छुट्टी)
- मातृत्व लाभ अधिनियम — धारा 12 (बर्खास्तगी आपराधिक अपराध है)
- मातृत्व लाभ अधिनियम — धारा 11A (क्रेच सुविधा)
- ESI अधिनियम — धारा 50 (ESI सदस्यों के लिए मातृत्व लाभ)
- अनुच्छेद 42 — मातृत्व सहायता