आपके अधिकार
वैवाहिक क्रूरता के लिए कौन-से कानूनी उपाय हैं?
छोटा जवाब
संरक्षण और भरण-पोषण के लिए DV एक्ट के तहत केस दायर करें। BNS धारा 85 के तहत शिकायत दर्ज करें। क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्ज़ी दें।
मामले को समझें
वैवाहिक क्रूरता के लिए भारतीय कानून में कई उपाय हैं। पहला, तुरंत संरक्षण आदेश, निवास आदेश और आर्थिक राहत के लिए घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करें। दूसरा, BNS धारा 85 (पति या उसके रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता) के तहत आपराधिक शिकायत दर्ज करें — यह संज्ञेय अपराध है, जिसमें 3 साल तक की जेल हो सकती है। तीसरा, हिंदू विवाह अधिनियम धारा 13 के तहत क्रूरता के आधार पर तलाक की अर्ज़ी दें। ये सभी उपाय एक साथ अपनाए जा सकते हैं। अतिरिक्त मदद के लिए आप राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) या राज्य महिला आयोग से भी संपर्क कर सकती हैं। वैवाहिक क्रूरता झेल रही महिलाओं को DLSA के ज़रिए मुफ़्त कानूनी सहायता मिलती है।
लागू कानून
- BNS धारा 85 (पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता)
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम — धारा 12, 18, 19, 20
- हिंदू विवाह अधिनियम — धारा 13 (तलाक के आधार)