आपके अधिकार
मेरे पति मुझे आर्थिक सहारा नहीं दे रहे — मैं क्या कर सकती हूँ?
छोटा जवाब
आप BNSS धारा 144, हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम, या DV एक्ट धारा 20 के तहत भरण-पोषण के लिए आवेदन कर सकती हैं। अदालत पति की आय के आधार पर मासिक भरण-पोषण का आदेश दे सकती है।
मामले को समझें
कई कानूनों के तहत पति कानूनी रूप से पत्नी का भरण-पोषण करने के लिए बाध्य है। आपके विकल्प: 1) BNSS धारा 144 (पत्नी, बच्चों और माता-पिता का भरण-पोषण) के तहत आवेदन करें — यह सबसे तेज़ उपाय है, जो मजिस्ट्रेट कोर्ट में दायर होता है। अदालत कुछ ही हफ़्तों में अंतरिम भरण-पोषण का आदेश दे सकती है। 2) हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम धारा 18 के तहत आवेदन करें (अगर आप हिंदू हैं) — अगर पति ने पत्नी को छोड़ दिया है, उसके साथ क्रूरता की है, उसकी दूसरी पत्नी है, या वह किसी संक्रामक बीमारी से पीड़ित है, तो पत्नी अलग रहकर भरण-पोषण मांगने की हकदार है। 3) घरेलू हिंसा अधिनियम धारा 20 के तहत आवेदन करें — अगर किसी भी तरह की घरेलू हिंसा (आर्थिक शोषण सहित) हुई है, तो आपको आर्थिक राहत मिल सकती है। 4) हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत तलाक की कार्यवाही के हिस्से के रूप में भरण-पोषण मांगें। अदालत पति की आय, पत्नी की आय, जीवन स्तर, आश्रितों की संख्या और दूसरे पहलुओं पर विचार करती है। आमतौर पर अदालतें पति की शुद्ध आय का 20-30% भरण-पोषण के रूप में तय करती हैं। पत्नी ससुराल में रहते हुए भी भरण-पोषण पा सकती है।
लागू कानून
- BNSS धारा 144 — पत्नी, बच्चों और माता-पिता का भरण-पोषण
- हिंदू दत्तक ग्रहण और भरण-पोषण अधिनियम — धारा 18
- घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम — धारा 20 (आर्थिक राहत)
- हिंदू विवाह अधिनियम — धारा 25 (स्थायी गुज़ारा भत्ता)