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आपके अधिकार

क्या बच्चे की कस्टडी में मां को प्राथमिकता मिलती है?

छोटा जवाब

5 साल से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी आम तौर पर मां को मिलती है। बड़े बच्चों के मामले में अदालत बच्चे के कल्याण को सबसे ऊपर रखती है।

मामले को समझें

हिंदू अल्पवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम की धारा 6 के तहत नाबालिग का प्राकृतिक संरक्षक पिता है, लेकिन 5 साल से कम उम्र के बच्चों की कस्टडी आम तौर पर मां के पास रहती है। हालांकि, संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम की धारा 7 के तहत अदालत के लिए सबसे अहम बात बच्चे का कल्याण है, न कि माता या पिता के अधिकार। अदालत बच्चे की उम्र, लिंग, (समझदार उम्र हो तो) इच्छा, माता-पिता का चरित्र, आर्थिक क्षमता, भावनात्मक जुड़ाव और रहने की व्यवस्था जैसी बातें देखती है। संयुक्त कस्टडी और मिलने के अधिकार के आदेश आम हैं। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा है कि कस्टडी विवादों में बच्चे का कल्याण ही एकमात्र निर्णायक आधार है।

लागू कानून

  • संरक्षक और प्रतिपाल्य अधिनियम — धारा 7 (नाबालिग का कल्याण सर्वोपरि)
  • हिंदू अल्पवयस्कता और संरक्षकता अधिनियम — धारा 6 (प्राकृतिक संरक्षक)