आपके अधिकार
एफआईआर दर्ज होने के बाद क्या होता है?
छोटा जवाब
एफआईआर दर्ज होने के बाद पुलिस मामले की जांच करती है, सबूत जुटाती है, बयान दर्ज करती है और 60-90 दिनों के भीतर मजिस्ट्रेट को चार्जशीट या क्लोज़र रिपोर्ट सौंपती है।
मामले को समझें
एफआईआर दर्ज होते ही जांच की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। पुलिस एक जांच अधिकारी (IO) नियुक्त करती है, जो घटनास्थल पर जाता है, सबूत जुटाता है, BNSS धारा 180 के तहत गवाहों के बयान दर्ज करता है और ज़रूरत पड़ने पर आरोपी को गिरफ़्तार कर सकता है। संज्ञेय अपराधों में पुलिस मजिस्ट्रेट की अनुमति के बिना जांच कर सकती है। IO को 60 दिनों के भीतर (अगर सज़ा 10 साल से कम है) या 90 दिनों के भीतर (अगर सज़ा 10 साल या उससे ज़्यादा है) जांच पूरी करनी होती है। जांच के बाद IO या तो चार्जशीट (अगर सबूत मिले) या क्लोज़र रिपोर्ट (अगर सबूत नहीं मिले) सौंपता है। आपको एफआईआर की कॉपी मुफ़्त पाने, अपने केस की स्थिति ट्रैक करने और क्लोज़र रिपोर्ट से असहमत होने पर प्रोटेस्ट पिटीशन दायर करने का अधिकार है। इसके बाद मजिस्ट्रेट तय करता है कि अपराध का संज्ञान लेना है या नहीं।
लागू कानून
- BNSS धारा 176 — जांच की प्रक्रिया
- BNSS धारा 180 — पुलिस द्वारा गवाहों की जांच
- BNSS धारा 193 — पुलिस अधिकारी की रिपोर्ट (चार्जशीट)
- BNSS धारा 210 — मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान