आपके अधिकार
पुलिस मुझे जज के सामने पेश किए बिना कितनी देर रख सकती है?
छोटा जवाब
ज़्यादा से ज़्यादा 24 घंटे। गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर (यात्रा का समय छोड़कर) पुलिस को आपको मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा।
मामले को समझें
संविधान का अनुच्छेद 22(2) कहता है कि गिरफ़्तार किए गए हर व्यक्ति को गिरफ़्तारी के 24 घंटे के भीतर नज़दीकी मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना होगा, जिसमें गिरफ़्तारी की जगह से मजिस्ट्रेट की अदालत तक की यात्रा का समय शामिल नहीं है। BNSS धारा 187 भी यही शर्त दोहराती है। अगर पुलिस आपको 24 घंटे के भीतर पेश नहीं करती, तो हिरासत गैरकानूनी हो जाती है और आप बंदी प्रत्यक्षीकरण (habeas corpus) याचिका के ज़रिए तुरंत रिहाई मांग सकते हैं। इसके बाद मजिस्ट्रेट तय करता है कि आगे रिमांड (पुलिस या न्यायिक हिरासत) देनी है या आपको ज़मानत पर छोड़ना है। यह गैरकानूनी हिरासत के खिलाफ एक बेहद अहम सुरक्षा है।
लागू कानून
- अनुच्छेद 22(2) — 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेशी
- BNSS धारा 187 — गिरफ़्तार व्यक्ति को मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना