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कार्यस्थल उत्पीड़न

आपको कार्यस्थल पर उत्पीड़न या भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है।

अभी यह करें
  1. 01हर घटना का रिकॉर्ड रखें — तारीख, समय, जगह, गवाह, क्या हुआ
  2. 02सारे सबूत सुरक्षित रखें — ईमेल, मैसेज, रिकॉर्डिंग (जहां कानूनी हो)
  3. 03आंतरिक शिकायत समिति (ICC) में लिखित शिकायत दर्ज करें
  4. 04अगर ICC नहीं है — ज़िला स्तर की स्थानीय शिकायत समिति में शिकायत दर्ज करें
  5. 05घटना के 3 महीने के भीतर शिकायत दर्ज करें
  6. 06अगर शारीरिक हमला हुआ — पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें
  7. 07दबाव में इस्तीफ़ा न दें — पहले कानूनी सलाह लें
  8. 08शिकायतों के लिए SHe-Box ऑनलाइन पोर्टल (shebox.nic.in) इस्तेमाल करें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
  1. तारीखों और विवरण के साथ घटनाओं का लिखित रिकॉर्ड
  2. उत्पीड़न करने वाले के ईमेल, मैसेज या चैट
  3. गवाहों के नाम और गवाही देने की उनकी तैयारी
  4. CCTV फ़ुटेज (अगर उपलब्ध हो)
  5. ऑडियो/वीडियो रिकॉर्डिंग (जहां कानूनी रूप से अनुमति हो)
  6. मेडिकल या मनोवैज्ञानिक रिपोर्ट
  7. बदले की कार्रवाई दिखाने वाली परफ़ॉर्मेंस रिव्यू
ज़रूरी दस्तावेज़
  1. ICC / LCC को लिखित शिकायत
  2. घटना की विस्तृत रिपोर्ट
  3. सबूत — ईमेल, मैसेज, फ़ोटो
  4. गवाहों के बयान
  5. रोज़गार के दस्तावेज़
  6. पहचान पत्र
  7. मेडिकल रिपोर्ट (अगर लागू हो)
शिकायत कहां करें
  1. आंतरिक शिकायत समिति (ICC) — आपके कार्यस्थल पर
  2. स्थानीय शिकायत समिति (LCC) — ज़िला अधिकारी के कार्यालय में
  3. SHe-Box — shebox.nic.in (ऑनलाइन शिकायत)
  4. पुलिस स्टेशन — आपराधिक अपराधों के लिए एफआईआर
  5. श्रम आयुक्त — कार्यस्थल के अधिकारों के उल्लंघन के लिए
  6. राष्ट्रीय महिला आयोग — ncw.nic.in
  7. राज्य महिला आयोग
लागू कानून
  1. कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम)
  2. BNS धारा 75 — यौन उत्पीड़न
  3. BNS धारा 76 — कपड़े उतारने के इरादे से हमला
  4. BNS धारा 77 — ताक-झांक
  5. BNS धारा 78 — पीछा करना
  6. औद्योगिक विवाद अधिनियम — गलत बर्खास्तगी के लिए
  7. समान पारिश्रमिक अधिनियम — वेतन में भेदभाव के लिए
मामले को समझें

कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण) अधिनियम, 2013 (POSH अधिनियम) 10+ कर्मचारियों वाले हर नियोक्ता के लिए आंतरिक शिकायत समिति (ICC) बनाना अनिवार्य करता है। इसमें शारीरिक और मौखिक उत्पीड़न, अनचाही यौन पहल, यौन संबंध की मांग और शत्रुतापूर्ण कामकाजी माहौल बनाना शामिल है। शिकायत 3 महीने के भीतर दर्ज करनी होगी। कार्यस्थल के सामान्य उत्पीड़न के लिए श्रम कानूनों, BNS और दीवानी कानून के तहत उपाय हैं।

वकील से कब मिलें

अगर ICC आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं करती, आपके साथ बदले की कार्रवाई या गलत बर्खास्तगी होती है, या आप आपराधिक और दीवानी, दोनों केस दायर करना चाहते हैं, तो वकील से सलाह लें।