financial
सप्लायर / विक्रेता धोखाधड़ी
सप्लायर ने एडवांस लेकर माल नहीं दिया, घटिया माल दिया, या पैसा लेकर गायब हो गया।
अभी यह करें
- 01रजिस्टर्ड पोस्ट या ईमेल से सप्लायर को औपचारिक लिखित मांग नोटिस भेजें
- 02सप्लायर के साथ हुई सारी बातचीत का रिकॉर्ड रखें (ऑर्डर, इनवॉइस, डिलीवरी रसीदें)
- 03अगर मिला हुआ सामान खराब या घटिया है, तो गुणवत्ता जांच रिपोर्ट लें
- 04अगर सप्लायर एडवांस लेकर फ़रार हो गया है, तो पुलिस शिकायत दर्ज करें
- 0515 दिनों के भीतर रिफ़ंड/डिलीवरी की मांग करते हुए वकील के ज़रिए कानूनी नोटिस भेजें
- 06अगर रकम बड़ी है, तो वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दायर करें
- 07व्यापार संघों के ज़रिए दूसरे कारोबारियों को धोखेबाज़ सप्लायर के बारे में सावधान करें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- परचेज़ ऑर्डर और इनवॉइस
- एडवांस भुगतान का सबूत (बैंक ट्रांसफ़र रसीदें, चेक की कॉपी)
- डिलीवरी चालान या गुड्स रिसीट नोट
- खराब सामान की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट
- सारी बातचीत (ईमेल, WhatsApp चैट, मैसेज)
- सप्लायर का GST रजिस्ट्रेशन और बिज़नेस विवरण
- मिले हुए खराब सामान की फ़ोटो
ज़रूरी दस्तावेज़
- परचेज़ ऑर्डर की कॉपी
- भुगतान की रसीदें और बैंक स्टेटमेंट
- सप्लायर को भेजा गया कानूनी नोटिस
- गुणवत्ता जांच रिपोर्ट (अगर लागू हो)
- बिज़नेस रजिस्ट्रेशन के दस्तावेज़
- पहचान पत्र
- GST इनवॉइस
शिकायत कहां करें
- नज़दीकी पुलिस स्टेशन — धोखाधड़ी की एफआईआर
- दीवानी अदालत — वसूली का मुकदमा
- उपभोक्ता अदालत (अगर आप अंतिम उपभोक्ता हैं)
- आर्बिट्रेशन (अगर कॉन्ट्रैक्ट में आर्बिट्रेशन क्लॉज़ है)
- आर्थिक अपराध शाखा — बड़े पैमाने की धोखाधड़ी के लिए
लागू कानून
- भारतीय संविदा अधिनियम — धारा 73, 74 (अनुबंध तोड़ने पर मुआवज़ा)
- माल विक्रय अधिनियम — धारा 12-16 (शर्तें और वारंटी)
- BNS धारा 318 — धोखाधड़ी
- BNS धारा 316 — आपराधिक विश्वासघात
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम — धारा 35 (अगर अंतिम उपभोक्ता हैं)
मामले को समझें
सप्लायर की धोखाधड़ी हर आकार के कारोबार को प्रभावित करती है। भारतीय संविदा अधिनियम के तहत, भुगतान लेने के बाद सामान न देना अनुबंध का उल्लंघन है। अगर सप्लायर ने जानबूझकर सामान के बारे में गलत जानकारी दी या उसका सामान देने का इरादा ही नहीं था, तो यह BNS के तहत धोखाधड़ी है। आप आपराधिक शिकायत और वसूली का दीवानी मुकदमा, दोनों दायर कर सकते हैं। अगर आप अंतिम उपयोगकर्ता हैं, तो सामान से जुड़े विवादों में उपभोक्ता फ़ोरम भी जा सकते हैं।
वकील से कब मिलें
अगर रकम बड़ी है, सप्लायर फ़रार हो गया है, या आपको अदालत में वसूली का मुकदमा दायर करना है, तो वकील से सलाह लें।