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पीछा करना / गोपनीयता का उल्लंघन
कोई आपका पीछा कर रहा है, आपकी गतिविधियों पर नज़र रख रहा है, या अनचाहे संदेश भेज रहा है।
अभी यह करें
- 01हर घटना का रिकॉर्ड रखें — तारीख, समय, जगह, विवरण
- 02पीछा करने वाले के सभी मैसेज, ईमेल और सोशल मीडिया बातचीत सुरक्षित रखें
- 03पीछा करने वाले को सभी सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर ब्लॉक करें
- 04नज़दीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें
- 05साइबर क्राइम पोर्टल पर साइबर-स्टॉकिंग की रिपोर्ट करें — cybercrime.gov.in
- 06भरोसेमंद परिवार वालों और दोस्तों को स्थिति के बारे में बताएं
- 07अगर कोई शारीरिक रूप से पीछा कर रहा है, तो अपनी दिनचर्या और रास्ते बदलें
- 08अदालत के ज़रिए निरोधक आदेश (restraining order) के लिए आवेदन करें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- पीछा करने वाले मैसेज और सोशल मीडिया बातचीत के स्क्रीनशॉट
- बार-बार आई अनचाही कॉल दिखाने वाले कॉल रिकॉर्ड
- पीछा करने वाले को आपका पीछा करते दिखाने वाली CCTV फ़ुटेज
- पीछा करने वाले द्वारा ली गई फ़ोटो या वीडियो (अगर आपके पास हों)
- पीछा करते देखने वाले लोगों के गवाह बयान
- लोकेशन ट्रैकिंग डेटा या GPS सबूत
- ईमेल हेडर और IP पते (साइबर-स्टॉकिंग के लिए)
ज़रूरी दस्तावेज़
- एफआईआर की कॉपी
- तारीखों और विवरण के साथ घटनाओं का विस्तृत रिकॉर्ड
- स्क्रीनशॉट और डिजिटल सबूत
- गवाहों के बयान
- पहचान पत्र
- निरोधक आदेश का आवेदन (अगर दायर कर रहे हैं)
शिकायत कहां करें
- नज़दीकी पुलिस स्टेशन — BNS 77/78 के तहत एफआईआर
- साइबर क्राइम पोर्टल — cybercrime.gov.in (ऑनलाइन पीछा करने के लिए)
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन — 1930
- राष्ट्रीय महिला आयोग — ncw.nic.in
- महिला हेल्पलाइन — 181
- मजिस्ट्रेट कोर्ट — निरोधक / संरक्षण आदेश के लिए
लागू कानून
- BNS धारा 78 — पीछा करना (3 साल तक की जेल)
- BNS धारा 77 — ताक-झांक (7 साल तक की जेल)
- IT एक्ट धारा 66E — निजता का उल्लंघन
- IT एक्ट धारा 67 — इलेक्ट्रॉनिक रूप से अश्लील सामग्री प्रकाशित करना
- BNS धारा 75 — यौन उत्पीड़न
मामले को समझें
BNS के तहत पीछा करना और ताक-झांक आपराधिक अपराध हैं। पीछा करने में शारीरिक रूप से पीछा करना, इलेक्ट्रॉनिक निगरानी और सोशल मीडिया के ज़रिए साइबर-स्टॉकिंग शामिल है। ताक-झांक में किसी निजी कृत्य में लगी महिला को देखना या उसकी तस्वीरें लेना शामिल है। पीछा करने के पहले अपराध में 3 साल की जेल हो सकती है। ताक-झांक पर 7 साल तक की सज़ा हो सकती है। साइबर-स्टॉकिंग IT एक्ट के तहत भी आती है।
वकील से कब मिलें
अगर पीछा करने के साथ धमकियां भी दी जा रही हैं, आपको निरोधक आदेश चाहिए, या पुलिस आपकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं कर रही, तो वकील से सलाह लें।