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ऑनलाइन धोखाधड़ी / साइबर फ्रॉड

आपके साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी हुई है — UPI फ्रॉड, फिशिंग, या ऑनलाइन ठगी।

अभी यह करें
  1. 01अब कोई भी OTP, पासवर्ड या बैंक विवरण साझा न करें
  2. 02तुरंत अपने बैंक को कॉल करें और कार्ड/खाता ब्लॉक कराएं
  3. 03साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें: 1930
  4. 04राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर रिपोर्ट करें: cybercrime.gov.in
  5. 05नज़दीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें
  6. 06जिस प्लैटफ़ॉर्म पर धोखाधड़ी हुई (UPI ऐप, ई-कॉमर्स साइट), वहां रिपोर्ट करें
  7. 07सभी बातचीत, लेन-देन और मैसेज के स्क्रीनशॉट लें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
  1. धोखाधड़ी वाले मैसेज या कॉल के स्क्रीनशॉट
  2. पैसे कटने को दिखाने वाले बैंक लेन-देन स्टेटमेंट
  3. ट्रांज़ैक्शन ID और UPI रेफ़रेंस नंबर
  4. ठग का फ़ोन नंबर या ईमेल
  5. नकली वेबसाइट का URL (अगर लागू हो)
  6. ठग के साथ हुई कोई भी बातचीत
ज़रूरी दस्तावेज़
  1. एफआईआर की कॉपी
  2. धोखाधड़ी वाले लेन-देन दिखाने वाला बैंक स्टेटमेंट
  3. धोखाधड़ी वाली बातचीत के स्क्रीनशॉट
  4. पहचान पत्र (आधार/PAN)
  5. साइबर क्राइम पोर्टल की शिकायत संख्या
शिकायत कहां करें
  1. राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल — cybercrime.gov.in
  2. साइबर क्राइम हेल्पलाइन — 1930
  3. नज़दीकी पुलिस स्टेशन — एफआईआर
  4. आपके बैंक का धोखाधड़ी विभाग
  5. RBI लोकपाल (अगर बैंक समाधान नहीं कर रहा)
लागू कानून
  1. IT एक्ट धारा 66 — कंप्यूटर से जुड़े अपराध
  2. IT एक्ट धारा 66C — पहचान की चोरी
  3. IT एक्ट धारा 66D — कंप्यूटर का इस्तेमाल करके वेश बदलकर धोखाधड़ी
  4. BNS धारा 318 — धोखाधड़ी
  5. BNS धारा 319 — प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
मामले को समझें

ऑनलाइन धोखाधड़ी में UPI घोटाले (जिसमें कोई आपको बहलाकर पैसे भिजवाता है), फ़िशिंग हमले (जिसमें नकली लिंक आपके बैंक विवरण चुरा लेते हैं), OTP धोखाधड़ी (जिसमें कॉल करने वाले बैंक अधिकारी बनते हैं), और नकली ई-कॉमर्स साइटें (जो भुगतान लेकर सामान नहीं भेजतीं) शामिल हैं। भारतीय कानून में ये IT एक्ट और BNS, दोनों के तहत दंडनीय अपराध हैं।

वकील से कब मिलें

अगर धोखाधड़ी की रकम बड़ी है (Rs. 50,000 से ज़्यादा), पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं कर रही, या आपको दीवानी वसूली का मुकदमा दायर करना है, तो वकील से सलाह लें।