civil
सड़क दुर्घटना मुआवज़ा
सड़क दुर्घटना में आपको चोट लगी है और मुआवज़ा चाहिए।
अभी यह करें
- 01इलाज सुनिश्चित करें — तुरंत नज़दीकी अस्पताल पहुंचें
- 02112 (आपातकाल) और 108 (एम्बुलेंस) पर कॉल करें
- 03नज़दीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें
- 04वाहन नंबर, ड्राइवर का विवरण और बीमा का विवरण नोट करें
- 05दुर्घटना स्थल, वाहनों और चोटों की फ़ोटो लें
- 06चश्मदीद गवाहों का विवरण लें
- 07बीमा कंपनी को दुर्घटना की सूचना दें
- 08इलाज के सभी बिल और रिकॉर्ड संभालकर रखें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- एफआईआर की कॉपी
- मेडिकल रिकॉर्ड और बिल
- दुर्घटना स्थल और वाहन के नुकसान की फ़ोटो
- वाहन रजिस्ट्रेशन और बीमा का विवरण
- ड्राइवर के लाइसेंस का विवरण
- चश्मदीद गवाहों के बयान
- आय का सबूत (कमाई के नुकसान के दावे के लिए)
- विकलांगता प्रमाण पत्र (अगर स्थायी चोट है)
ज़रूरी दस्तावेज़
- MACT दावा याचिका
- एफआईआर की कॉपी और चार्जशीट
- मेडिकल रिकॉर्ड और बिल
- आय का सबूत (सैलरी स्लिप, ITR)
- उम्र का सबूत
- चोटों और दुर्घटना स्थल की फ़ोटो
- टक्कर मारने वाले वाहन के दस्तावेज़
- बीमा पॉलिसी का विवरण
शिकायत कहां करें
- मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT)
- पुलिस स्टेशन — एफआईआर के लिए
- बीमा कंपनी — दावे की सूचना
- ज़िला विधिक सेवा प्राधिकरण — मुफ़्त कानूनी सहायता के लिए
- उपभोक्ता अदालत — दावे में देरी पर बीमा कंपनी के खिलाफ
लागू कानून
- मोटर वाहन अधिनियम — धारा 166 (मुआवज़े के लिए आवेदन)
- मोटर वाहन अधिनियम — धारा 164 (नो-फ़ॉल्ट मुआवज़ा)
- मोटर वाहन अधिनियम — धारा 161 (हिट-एंड-रन मुआवज़ा)
- मोटर वाहन अधिनियम — धारा 146 (अनिवार्य बीमा)
- BNS धारा 106 — लापरवाही से मौत
- BNS धारा 125 — तेज़ और लापरवाह कार्य
मामले को समझें
मोटर वाहन अधिनियम सड़क दुर्घटना पीड़ितों को मुआवज़ा देता है। दावे मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में दायर किए जा सकते हैं। 'नो फ़ॉल्ट' सिद्धांत के तहत, पीड़ित लापरवाही साबित किए बिना Rs. 5 लाख तक पा सकते हैं। ज़्यादा रकम के लिए ड्राइवर की लापरवाही साबित करनी होगी। हिट-एंड-रन पीड़ित सोलेशियम फ़ंड से दावा कर सकते हैं। दावा दुर्घटना के 6 महीने के भीतर दायर करना होगा (न्यायाधिकरण इसे बढ़ा सकता है)।
वकील से कब मिलें
MACT दावा दायर करने, सही मुआवज़ा तय करने और बीमा कंपनी के खिलाफ कार्यवाही संभालने के लिए वकील से सलाह लें। दुर्घटना के मामलों में कई वकील 'केस जीतने पर ही फ़ीस' के आधार पर काम करते हैं।