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वैवाहिक धोखाधड़ी
शादी में धोखा दिया गया — पहले से शादीशुदा होने की बात छिपाई, झूठी जानकारी दी, या NRI शादी में धोखा हुआ।
अभी यह करें
- 01धोखाधड़ी के सबूत जुटाएं — झूठे दस्तावेज़, नकली नौकरी पत्र, छिपाई गई वैवाहिक स्थिति
- 02वैवाहिक विवादों में अनुभवी फ़ैमिली वकील से सलाह लें
- 03पुलिस स्टेशन में धोखाधड़ी (BNS 318) की एफआईआर दर्ज करें
- 04धारा 12 के तहत फ़ैमिली कोर्ट में विवाह रद्द करने की याचिका दायर करें
- 05अगर झूठे वादों के आधार पर दहेज दिया गया था, तो दहेज निषेध अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करें
- 06अगर रिश्ता ऑनलाइन प्लैटफ़ॉर्म के ज़रिए हुआ था, तो मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर रिपोर्ट करें
- 07कोई भी सबूत या बातचीत नष्ट न करें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- मैचमेकिंग प्लैटफ़ॉर्म से मैट्रिमोनियल प्रोफ़ाइल और चैट रिकॉर्ड
- जीवनसाथी द्वारा दिए गए झूठे दस्तावेज़ (नकली नौकरी पत्र, आय का सबूत)
- दहेज का लेन-देन दिखाने वाली शादी की फ़ोटो और वीडियो
- गलत जानकारी दिखाने वाले बातचीत के रिकॉर्ड (मैसेज, कॉल)
- परिवार और दोस्तों के गवाह बयान
- सच साबित करने वाले दस्तावेज़ (जैसे जीवनसाथी की पिछली शादी का प्रमाण पत्र)
- दिए गए पैसे या तोहफ़े दिखाने वाले बैंक रिकॉर्ड
ज़रूरी दस्तावेज़
- धोखाधड़ी की एफआईआर की कॉपी
- फ़ैमिली कोर्ट में विवाह रद्द करने की याचिका
- विवाह प्रमाण पत्र
- धोखाधड़ी के सबूत (नकली दस्तावेज़, बातचीत)
- दहेज की सूची (अगर दहेज दिया गया था)
- पहचान पत्र
शिकायत कहां करें
- पुलिस स्टेशन — धोखाधड़ी की एफआईआर (BNS 318)
- फ़ैमिली कोर्ट — HMA धारा 12 के तहत विवाह रद्द करने की याचिका
- मैट्रिमोनियल वेबसाइट — नकली प्रोफ़ाइल की रिपोर्ट करें
- साइबर क्राइम पोर्टल — अगर ऑनलाइन मैट्रिमोनियल धोखाधड़ी है
- राष्ट्रीय महिला आयोग — ncw.nic.in
- उपभोक्ता अदालत — लापरवाही के लिए मैट्रिमोनियल प्लैटफ़ॉर्म के खिलाफ
लागू कानून
- हिंदू विवाह अधिनियम — धारा 12 (धोखे के कारण शून्यकरणीय विवाह)
- हिंदू विवाह अधिनियम — धारा 25 (विवाह रद्द होने पर स्थायी गुज़ारा भत्ता)
- BNS धारा 318 — धोखाधड़ी
- BNS धारा 319 — प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
- भारतीय संविदा अधिनियम — धारा 17 (सहमति में धोखा)
मामले को समझें
वैवाहिक धोखाधड़ी तब होती है जब कोई पक्ष शादी से पहले अहम तथ्य छिपाता है या गलत बताता है — जैसे पिछली शादी, नपुंसकता, मानसिक बीमारी, आपराधिक रिकॉर्ड, नौकरी या आय। हिंदू विवाह अधिनियम के तहत धोखे से हुई शादी शून्यकरणीय है और रद्द की जा सकती है। इसके अलावा, BNS धारा 318 के तहत धोखाधड़ी का आपराधिक केस भी दर्ज किया जा सकता है। अगर धोखे से दहेज लिया गया था, तो दहेज निषेध अधिनियम के तहत भी केस बनता है।
वकील से कब मिलें
तुरंत वकील से सलाह लें। धोखे का पता चलने के 1 साल के भीतर विवाह रद्द करने की याचिका दायर करनी होगी। वकील आपराधिक और दीवानी केस एक साथ दायर करने और आपके आर्थिक हितों की रक्षा करने में मदद कर सकता है।