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मातृत्व अवकाश से इनकार / गर्भावस्था के कारण भेदभाव

आपका नियोक्ता मातृत्व अवकाश देने से मना कर रहा है, गर्भावस्था के दौरान आपको नौकरी से निकाल दिया है, या कानून के अनुसार मातृत्व लाभ नहीं दे रहा है।

अभी यह करें
  1. 01अपने नियोक्ता को गर्भावस्था और डिलीवरी की अनुमानित तारीख के बारे में लिखित सूचना दें
  2. 02मातृत्व लाभ अधिनियम का हवाला देते हुए मातृत्व अवकाश के लिए लिखित आवेदन दें
  3. 03छुट्टी के अनुरोध के बारे में HR/नियोक्ता से हुई सारी बातचीत की कॉपी रखें
  4. 04अगर नौकरी से निकाला गया, तो मातृत्व लाभ अधिनियम की धारा 12 का हवाला देते हुए कानूनी नोटिस भेजें
  5. 05श्रम निरीक्षक या ज़िला श्रम आयुक्त के पास शिकायत दर्ज करें
  6. 06अगर ESI के दायरे में हैं, तो ESIC के ज़रिए मातृत्व लाभ का दावा करें
  7. 07कार्यस्थल पर किसी भी भेदभावपूर्ण व्यवहार या शत्रुतापूर्ण बर्ताव का रिकॉर्ड रखें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
  1. रोज़गार अनुबंध और नियुक्ति पत्र
  2. गर्भावस्था और डिलीवरी की अनुमानित तारीख की पुष्टि करने वाला मेडिकल प्रमाण पत्र
  3. लिखित छुट्टी आवेदन और नियोक्ता का जवाब
  4. पिछले 12 महीनों की सैलरी स्लिप
  5. ESI योगदान के रिकॉर्ड (अगर लागू हो)
  6. छुट्टी से इनकार या भेदभाव दिखाने वाली बातचीत
  7. बर्खास्तगी पत्र (अगर निकाला गया)
  8. मातृत्व अवकाश पर HR नीति के दस्तावेज़
ज़रूरी दस्तावेज़
  1. रजिस्टर्ड डॉक्टर का मेडिकल प्रमाण पत्र
  2. रोज़गार का सबूत (नियुक्ति पत्र, सैलरी स्लिप)
  3. मातृत्व अवकाश का लिखित आवेदन
  4. श्रम निरीक्षक को शिकायत
  5. कानूनी नोटिस (अगर नौकरी से निकाला गया)
  6. पहचान पत्र
शिकायत कहां करें
  1. श्रम निरीक्षक / श्रम आयुक्त
  2. ESIC कार्यालय (अगर ESI सदस्य हैं)
  3. श्रम न्यायालय
  4. ज़िला अदालत — मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत
  5. राज्य महिला आयोग
  6. राष्ट्रीय महिला आयोग — ncw.nic.in
लागू कानून
  1. मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 — धारा 5 (मातृत्व लाभ का अधिकार — 26 हफ़्ते)
  2. मातृत्व लाभ अधिनियम — धारा 12 (अनुपस्थिति के दौरान बर्खास्तगी — आपराधिक अपराध)
  3. मातृत्व लाभ अधिनियम — धारा 11A (50+ कर्मचारियों के लिए क्रेच सुविधा अनिवार्य)
  4. ESI अधिनियम — धारा 50 (बीमित महिलाओं के लिए मातृत्व लाभ)
  5. अनुच्छेद 42 — राज्य मातृत्व सहायता का प्रावधान करेगा
मामले को समझें

मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 (2017 में संशोधित) पहले दो बच्चों के लिए 26 हफ़्ते और तीसरे बच्चे से आगे 12 हफ़्ते का सवेतन मातृत्व अवकाश देता है। यह 10 या उससे ज़्यादा कर्मचारियों वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होता है। मातृत्व अवकाश के दौरान महिला को नौकरी से निकालना या मातृत्व लाभ से इनकार करना आपराधिक अपराध है। 50+ कर्मचारियों वाले नियोक्ता को क्रेच की सुविधा भी देनी होगी। केंद्रीय सिविल सेवा नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों को 180 दिन तक का मातृत्व अवकाश मिल सकता है।

वकील से कब मिलें

अगर गर्भावस्था या मातृत्व अवकाश के दौरान आपको नौकरी से निकाला गया है, तो तुरंत वकील से सलाह लें। यह आपराधिक अपराध है और आप अच्छे-खासे मुआवज़े की हकदार हो सकती हैं।