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मकान मालिक ने जमानत राशि नहीं लौटाई
मकान मालिक आपकी सिक्योरिटी डिपॉज़िट वापस नहीं कर रहा।
अभी यह करें
- 01डिपॉज़िट वापसी के लिए विनम्र लिखित अनुरोध (ईमेल/WhatsApp) भेजें
- 02मकान छोड़ते समय संपत्ति की हालत का रिकॉर्ड रखें (फ़ोटो/वीडियो)
- 03मकान मालिक से सौंपने की पावती लें
- 04जवाब न मिले — वकील के ज़रिए कानूनी नोटिस भेजें
- 05किराया नियंत्रक / किराया प्राधिकरण में शिकायत दर्ज करें
- 06डिपॉज़िट की रकम वसूलने के लिए दीवानी मुकदमा दायर करें
- 07छोटी रकम के लिए — स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट जाएं
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- किराया एग्रीमेंट / लीज़ डीड
- सिक्योरिटी डिपॉज़िट की रसीद या बैंक ट्रांसफ़र का सबूत
- मकान छोड़ते समय संपत्ति की हालत की फ़ोटो/वीडियो
- सौंपने की पावती (अगर ली हो)
- मकान मालिक से हुई बातचीत (मैसेज, ईमेल)
- किराया भुगतान की रसीदें
- बिजली/पानी के अंतिम बिलों का भुगतान
ज़रूरी दस्तावेज़
- किराया अनुबंध
- डिपॉज़िट भुगतान का सबूत
- कानूनी नोटिस की कॉपी (अगर भेजा हो)
- संपत्ति की हालत की फ़ोटो
- बातचीत के रिकॉर्ड
- पहचान पत्र और पते का सबूत
शिकायत कहां करें
- किराया नियंत्रक / किराया प्राधिकरण — किराया विवादों के लिए
- स्मॉल कॉज़ेज़ कोर्ट — पैसे की वसूली के लिए
- दीवानी अदालत — बड़ी रकम के लिए
- मध्यस्थता केंद्र — आपसी समझौते के लिए
- पुलिस स्टेशन — आपराधिक विश्वासघात होने पर
लागू कानून
- राज्य किराया नियंत्रण अधिनियम (राज्य के अनुसार अलग)
- संपत्ति अंतरण अधिनियम — धारा 108 (पट्टेदार के अधिकार)
- भारतीय संविदा अधिनियम — धारा 73 (अनुबंध तोड़ने पर मुआवज़ा)
- मॉडल किरायेदारी अधिनियम, 2021 (अगर राज्य ने अपनाया हो)
- BNS धारा 316 — आपराधिक विश्वासघात
मामले को समझें
जब किरायेदार किराये का मकान खाली करता है, तो मकान मालिक सामान्य टूट-फूट से ज़्यादा की मरम्मत के वाजिब खर्च काटकर सिक्योरिटी डिपॉज़िट लौटाने के लिए कानूनी रूप से बाध्य है। ज़्यादातर राज्य किराया नियंत्रण अधिनियमों में डिपॉज़िट लौटाने की समय-सीमा तय है। अगर मकान मालिक मना करे, तो आप कानूनी नोटिस भेज सकते हैं, किराया प्राधिकरण में शिकायत दर्ज कर सकते हैं, या दीवानी मुकदमा दायर कर सकते हैं। किराया एग्रीमेंट और डिपॉज़िट की रसीद को मुख्य सबूत के तौर पर संभालकर रखें।
वकील से कब मिलें
अगर डिपॉज़िट की रकम बड़ी है, मकान मालिक नुकसान के झूठे दावे कर रहा है, या आपको वसूली के लिए अदालत में केस करना है, तो वकील से सलाह लें।