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बीमा दावा अस्वीकृत
आपका स्वास्थ्य, जीवन, या वाहन बीमा दावा बीमा कंपनी ने बिना उचित कारण खारिज कर दिया है।
अभी यह करें
- 01बीमा कंपनी से खास कारणों के साथ अस्वीकृति पत्र लें
- 02अपनी पॉलिसी के नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें
- 03बीमा कंपनी के शिकायत सेल को लिखित प्रतिवेदन भेजें
- 04IRDAI IGMS पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें — igms.irda.gov.in
- 05अस्वीकृति के 1 साल के भीतर बीमा लोकपाल से संपर्क करें
- 06अगर लोकपाल समाधान न करे, तो उपभोक्ता अदालत में केस दायर करें
- 07पॉलिसी के सभी दस्तावेज़, प्रीमियम की रसीदें और दावे से जुड़ा पत्राचार जुटाएं
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- बीमा पॉलिसी का दस्तावेज़ और शर्तें
- प्रीमियम भुगतान की रसीदें
- जमा किया गया दावा आवेदन और सहायक दस्तावेज़
- बीमा कंपनी का अस्वीकृति पत्र
- बीमा कंपनी के साथ सारा पत्राचार
- मेडिकल बिल और अस्पताल के रिकॉर्ड (स्वास्थ्य दावों के लिए)
- एफआईआर की कॉपी (वाहन चोरी या दुर्घटना के दावों के लिए)
ज़रूरी दस्तावेज़
- बीमा पॉलिसी का दस्तावेज़
- दावा अस्वीकृति पत्र
- बीमा कंपनी को जमा किए गए दावे से जुड़े सभी दस्तावेज़
- प्रीमियम भुगतान का सबूत
- IRDAI IGMS पर शिकायत
- बीमा लोकपाल शिकायत फ़ॉर्म
शिकायत कहां करें
- बीमा कंपनी का शिकायत सेल — पहला कदम
- IRDAI IGMS पोर्टल — igms.irda.gov.in
- बीमा लोकपाल — अस्वीकृति के 1 साल के भीतर
- ज़िला उपभोक्ता फ़ोरम — Rs. 50 लाख तक के दावे
- राज्य उपभोक्ता आयोग — Rs. 50 लाख-2 करोड़ के दावे
- राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग — Rs. 2 करोड़ से ज़्यादा के दावे
लागू कानून
- बीमा अधिनियम — धारा 45 (3 साल बाद पॉलिसी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता)
- IRDAI (पॉलिसीधारकों के हितों का संरक्षण) विनियम
- उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम — धारा 2(11) (सेवा में कमी)
- बीमा लोकपाल नियम — विवाद समाधान के लिए
- मोटर वाहन अधिनियम — धारा 146 (अनिवार्य वाहन बीमा)
मामले को समझें
भारत में बीमा कंपनियां IRDAI (भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण) के नियमन में हैं। अगर आपका दावा गलत तरीके से खारिज किया गया है, तो आप बीमा लोकपाल, IRDAI शिकायत सेल या उपभोक्ता अदालत में शिकायत दर्ज कर सकते हैं। बीमा अधिनियम की धारा 45 के तहत, 3 साल बाद गलत जानकारी के आधार पर पॉलिसी पर सवाल नहीं उठाया जा सकता। दावा खारिज करने के साफ़ कारण लिखित में बताने होंगे।
वकील से कब मिलें
अगर दावे की रकम बड़ी है, लोकपाल का फ़ैसला आपके खिलाफ है, या आपको उपभोक्ता अदालत जाना है, तो बीमा कानून के विशेषज्ञ वकील से सलाह लें।