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उत्तराधिकार विवाद

परिवार में संपत्ति के बँटवारे या वसीयत को लेकर विवाद है — उत्तराधिकार के अधिकार और कानूनी प्रक्रिया जानें।

अभी यह करें
  1. 01परिवार या अदालत से वसीयत की कॉपी लें (अगर वसीयत है)
  2. 02लागू उत्तराधिकार कानून के अनुसार सभी कानूनी वारिसों की पहचान करें
  3. 03तहसीलदार या अदालत से कानूनी वारिस प्रमाण पत्र के लिए आवेदन करें
  4. 04अगर वसीयत पर विवाद है — अदालत में प्रोबेट याचिका या वसीयत को चुनौती देने का मुकदमा दायर करें
  5. 05बैंक खातों और निवेश के लिए अदालत से उत्तराधिकार प्रमाण पत्र लें
  6. 06किसी एक वारिस को अकेले संपत्ति बेचने या ट्रांसफ़र करने न दें
  7. 07कानून के तहत अपना सही हिस्सा समझने के लिए वकील से सलाह लें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
  1. वसीयत की कॉपी (अगर उपलब्ध हो)
  2. मृतक का मृत्यु प्रमाण पत्र
  3. मृतक के नाम की संपत्ति के दस्तावेज़
  4. वंश-वृक्ष और कानूनी वारिसों की सूची
  5. मृतक के बैंक खाते और निवेश का विवरण
  6. अनुचित दबाव या जालसाज़ी के सबूत (अगर वसीयत को चुनौती दे रहे हैं)
  7. पहले के बंटवारा विलेख या पारिवारिक समझौते
ज़रूरी दस्तावेज़
  1. प्रोबेट याचिका / उत्तराधिकार याचिका
  2. मृत्यु प्रमाण पत्र
  3. वसीयत की कॉपी (अगर उपलब्ध हो)
  4. कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
  5. संपत्ति के दस्तावेज़
  6. वंश-वृक्ष का हलफ़नामा
शिकायत कहां करें
  1. दीवानी अदालत — प्रोबेट याचिका / वसीयत को चुनौती का मुकदमा
  2. ज़िला अदालत — उत्तराधिकार प्रमाण पत्र का आवेदन
  3. तहसीलदार कार्यालय — कानूनी वारिस प्रमाण पत्र
  4. राजस्व अदालत — संपत्ति रिकॉर्ड में नामांतरण (म्यूटेशन) के लिए
  5. हाई कोर्ट — निचली अदालत के फ़ैसलों के खिलाफ अपील के लिए
  6. मध्यस्थता केंद्र — पारिवारिक समझौते के लिए
लागू कानून
  1. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम — धारा 6 (सहदायिक संपत्ति — बेटियों को बराबर अधिकार)
  2. हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम — धारा 8 (उत्तराधिकार के सामान्य नियम — क्लास I वारिस)
  3. भारतीय उत्तराधिकार अधिनियम — धारा 63 (वैध वसीयत की शर्तें)
  4. संपत्ति अंतरण अधिनियम — धारा 122 (संपत्ति का दान)
  5. परिसीमा अधिनियम — उत्तराधिकार के मामले दायर करने की समय-सीमा
मामले को समझें

भारत में उत्तराधिकार कानून धर्म के अनुसार अलग-अलग हैं। हिंदुओं पर हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम लागू होता है, जिसमें (2005 के संशोधन के बाद) पैतृक संपत्ति में बेटों और बेटियों, दोनों के बराबर अधिकार हैं। वसीयत को जालसाज़ी, अनुचित दबाव या वसीयत करने वाले की मानसिक अस्वस्थता के आधार पर चुनौती दी जा सकती है। कुछ राज्यों में वसीयत का प्रोबेट अनिवार्य है। बिना वसीयत के उत्तराधिकार (जब कोई वसीयत न हो) धर्म के आधार पर लागू उत्तराधिकार कानून के अनुसार होता है।

वकील से कब मिलें

उत्तराधिकार कानून में अनुभवी वकील से सलाह लें। उत्तराधिकार के विवादों में धर्म और राज्य के अनुसार अलग-अलग जटिल कानून लागू होते हैं। वकील आपका सही हिस्सा तय करने और उचित कानूनी कार्यवाही शुरू करने में मदद कर सकता है।