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घरेलू हिंसा
आप घरेलू हिंसा का शिकार हैं — शारीरिक, मानसिक, या आर्थिक।
अभी यह करें
- 01अगर तुरंत खतरा है, तो महिला हेल्पलाइन पर कॉल करें: 1091
- 02पुलिस को कॉल करें: 100 या 112
- 03किसी सुरक्षित जगह जाएं — रिश्तेदार के घर या आश्रय गृह
- 04किसी भी चोट का इलाज कराएं
- 05पुलिस स्टेशन में घरेलू घटना रिपोर्ट (DIR) दर्ज कराएं
- 06अपने ज़िले के संरक्षण अधिकारी से संपर्क करें
- 07मजिस्ट्रेट से संरक्षण आदेश के लिए आवेदन करें
- 08सभी घटनाओं को तारीख और विवरण के साथ लिखकर रखें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- चोटों की मेडिकल रिपोर्ट
- चोटों और नुकसान की फ़ोटो
- धमकी भरे मैसेज, कॉल या रिकॉर्डिंग
- पड़ोसियों या रिश्तेदारों के गवाह बयान
- घरेलू घटना रिपोर्ट
- आर्थिक शोषण दिखाने वाले वित्तीय रिकॉर्ड
- पहले की पुलिस शिकायतें (अगर हों)
ज़रूरी दस्तावेज़
- DV एक्ट के तहत आवेदन (संरक्षण अधिकारी या वकील के ज़रिए)
- मेडिकल रिपोर्ट
- विवाह प्रमाण पत्र
- पते का सबूत
- आय का विवरण
- दुर्व्यवहार की फ़ोटो और सबूत
शिकायत कहां करें
- महिला हेल्पलाइन — 1091
- पुलिस — 100 / 112
- संरक्षण अधिकारी — ज़िला कार्यालय
- मजिस्ट्रेट कोर्ट — DV एक्ट के तहत आवेदन
- राष्ट्रीय महिला आयोग — ncw.nic.in
- राज्य महिला आयोग
- वन स्टॉप सेंटर (सखी सेंटर) — पूरी मदद के लिए
- विधिक सहायता सेवाएं — मुफ़्त कानूनी प्रतिनिधित्व
लागू कानून
- घरेलू हिंसा अधिनियम, 2005 — धारा 3 (परिभाषा)
- घरेलू हिंसा अधिनियम — धारा 12 (मजिस्ट्रेट को आवेदन)
- घरेलू हिंसा अधिनियम — धारा 18 (संरक्षण आदेश)
- घरेलू हिंसा अधिनियम — धारा 19 (निवास आदेश)
- BNS धारा 85-86 — पति या रिश्तेदारों द्वारा क्रूरता
- दहेज निषेध अधिनियम — धारा 3
मामले को समझें
घरेलू हिंसा सिर्फ़ मारपीट नहीं है। इसमें मौखिक दुर्व्यवहार (अपमान, बेइज़्ज़ती), भावनात्मक दुर्व्यवहार (धमकियां, अलग-थलग करना), यौन दुर्व्यवहार और आर्थिक दुर्व्यवहार (पैसे न देना, पैसों पर नियंत्रण रखना) भी शामिल हैं। घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम संरक्षण आदेश, निवास आदेश, आर्थिक राहत और कस्टडी आदेश देता है। घरेलू रिश्ते में रहने वाली कोई भी महिला संरक्षण मांग सकती है।
वकील से कब मिलें
तुरंत कानूनी मदद लें। NALSA (15100) और विधिक सहायता सेवाओं के ज़रिए मुफ़्त कानूनी सहायता उपलब्ध है। वकील जल्दी संरक्षण आदेश दिलाने में मदद कर सकता है।