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साइबर बुलिंग / ऑनलाइन उत्पीड़न
आपको ऑनलाइन धमकाया, परेशान किया, या ट्रोल किया जा रहा है।
अभी यह करें
- 01परेशान करने वाले को सभी प्लैटफ़ॉर्म पर ब्लॉक करें
- 02उत्पीड़न के सभी स्क्रीनशॉट लें — कुछ भी डिलीट न करें
- 03सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म पर अकाउंट/कंटेंट की रिपोर्ट करें
- 04cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें
- 05साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल करें: 1930
- 06अगर जान से मारने की धमकी है — तुरंत पुलिस को कॉल करें: 112
- 07परेशान करने वाले से बातचीत न करें और ब्लैकमेल की कोई मांग पूरी न करें
- 08किसी भरोसेमंद व्यक्ति को बताएं
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- उत्पीड़न वाले मैसेज/पोस्ट के स्क्रीनशॉट
- परेशान करने वाले की प्रोफ़ाइल का विवरण (यूज़रनेम, प्रोफ़ाइल URL)
- उत्पीड़न का समय
- गवाहों के बयान
- आपकी रिपोर्ट पर प्लैटफ़ॉर्म का जवाब
- इस्तेमाल किए गए कोई भी फ़ोन नंबर या ईमेल ID
- धमकी भरी कॉल की रिकॉर्डिंग
ज़रूरी दस्तावेज़
- सबूतों के साथ लिखित शिकायत
- टाइमस्टैम्प वाले स्क्रीनशॉट
- अपना पहचान पत्र
- साइबर क्राइम पोर्टल की शिकायत संख्या
- प्लैटफ़ॉर्म रिपोर्ट के रेफ़रेंस नंबर
- एफआईआर की कॉपी
शिकायत कहां करें
- साइबर क्राइम पोर्टल — cybercrime.gov.in
- साइबर क्राइम हेल्पलाइन — 1930
- पुलिस स्टेशन — एफआईआर
- सोशल मीडिया प्लैटफ़ॉर्म — रिपोर्ट करने की सुविधा
- राष्ट्रीय महिला आयोग — अगर लिंग-आधारित उत्पीड़न है (ncw.nic.in)
- POCSO हेल्पलाइन (1098) — अगर पीड़ित बच्चा है
लागू कानून
- IT एक्ट धारा 67 — अश्लील सामग्री प्रकाशित करना
- IT एक्ट धारा 66E — निजता का उल्लंघन
- BNS धारा 351 — आपराधिक धमकी
- BNS धारा 356 — मानहानि
- BNS धारा 77-78 — ताक-झांक और पीछा करना
- POCSO एक्ट — अगर पीड़ित नाबालिग है
मामले को समझें
साइबर उत्पीड़न में ऑनलाइन पीछा करना, धमकी भरे मैसेज भेजना, सहमति के बिना अंतरंग तस्वीरें साझा करना (रिवेंज पोर्न), निजी फ़ोटो या जानकारी से ब्लैकमेल करना और लगातार ट्रोलिंग शामिल है। ये सभी IT एक्ट और BNS के तहत आपराधिक अपराध हैं। पीड़ितों को तुरंत सबूत सुरक्षित रखने चाहिए और साइबर क्राइम अधिकारियों को रिपोर्ट करनी चाहिए।
वकील से कब मिलें
अगर आपको ब्लैकमेल किया जा रहा है, अंतरंग तस्वीरें साझा की गई हैं, या आप आपराधिक केस और हर्जाने का दीवानी केस दोनों दायर करना चाहते हैं, तो वकील से सलाह लें।