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चेक बाउंस

आपको दिया गया चेक बाउंस हो गया है।

अभी यह करें
  1. 01अपने बैंक से चेक रिटर्न मेमो लें
  2. 02रिटर्न मेमो मिलने के 30 दिनों के भीतर कानूनी डिमांड नोटिस भेजें
  3. 03नोटिस रजिस्टर्ड पोस्ट / AD वाली स्पीड पोस्ट से भेजें
  4. 04व्यक्ति के भुगतान करने के लिए 15 दिन इंतज़ार करें
  5. 05अगर 15 दिनों में भुगतान न हो, तो अगले 30 दिनों के भीतर शिकायत दर्ज करें
  6. 06शिकायत उस अदालत में दर्ज करें, जिसके क्षेत्राधिकार में चेक जमा किया गया था
  7. 07सभी मूल दस्तावेज़ सुरक्षित रखें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
  1. बाउंस हुआ मूल चेक
  2. बैंक का चेक रिटर्न मेमो
  3. भेजे गए डिमांड नोटिस की कॉपी
  4. डाक रसीद और AD कार्ड
  5. मूल लेन-देन का सबूत (इनवॉइस, एग्रीमेंट आदि)
  6. चेक जमा होने और लौटने को दिखाने वाला बैंक स्टेटमेंट
ज़रूरी दस्तावेज़
  1. NI एक्ट की धारा 138 के तहत आपराधिक शिकायत
  2. बाउंस हुआ मूल चेक
  3. चेक रिटर्न मेमो
  4. डाक रसीद के साथ डिमांड नोटिस की कॉपी
  5. मूल लेन-देन का सबूत
  6. पहचान पत्र
शिकायत कहां करें
  1. मजिस्ट्रेट कोर्ट — जहां चेक भुगतान के लिए जमा किया गया था
  2. डिमांड नोटिस तैयार करने के लिए वकील
  3. मध्यस्थता केंद्र — समझौते के लिए
लागू कानून
  1. परक्राम्य लिखत अधिनियम — धारा 138 (चेक अनादरण)
  2. परक्राम्य लिखत अधिनियम — धारा 141 (कंपनियों द्वारा अपराध)
  3. परक्राम्य लिखत अधिनियम — धारा 142 (परिसीमा अवधि)
  4. परक्राम्य लिखत अधिनियम — धारा 143 (अदालत की शक्ति)
  5. BNS धारा 318 — धोखाधड़ी (अगर धोखा शामिल हो)
मामले को समझें

जब अपर्याप्त बैलेंस या किसी और कारण से चेक अनादरित (बाउंस) हो जाता है, तो यह परक्राम्य लिखत अधिनियम (NI Act) की धारा 138 के तहत आपराधिक अपराध है। बैंक का 'चेक रिटर्न मेमो' मिलने के 30 दिनों के भीतर आपको कानूनी डिमांड नोटिस भेजना होगा। अगर नोटिस मिलने के 15 दिनों के भीतर व्यक्ति भुगतान नहीं करता, तो 15 दिन की नोटिस अवधि खत्म होने के बाद 30 दिनों के भीतर आप आपराधिक शिकायत दर्ज कर सकते हैं। अदालत मुआवज़े के तौर पर चेक की रकम का दोगुना तक भुगतान करने का आदेश दे सकती है।

वकील से कब मिलें

चेक बाउंस होते ही तुरंत वकील से सलाह लें। कानूनी नोटिस और शिकायत की समय-सीमा सख्त है — इसे चूकने पर आप मुकदमा चलाने का अधिकार खो देते हैं।