criminal
धोखाधड़ी / ठगी
किसी ने आपको धोखा दिया है — पैसे, संपत्ति, या अन्य तरीके से।
अभी यह करें
- 01धोखाधड़ी के सारे सबूत जुटाएं — एग्रीमेंट, रसीदें, मैसेज
- 02नज़दीकी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करें
- 03पैसे वापस करने की मांग करते हुए उस व्यक्ति को कानूनी नोटिस भेजें
- 04कोई भी बातचीत या दस्तावेज़ नष्ट न करें
- 05अगर ऑनलाइन धोखाधड़ी है — cybercrime.gov.in पर भी रिपोर्ट करें
- 06ज़रूरत हो तो पैसे की वसूली के लिए दीवानी मुकदमा दायर करें
कौन से सबूत इकट्ठा करें
- लिखित एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट
- भुगतान की रसीदें, बैंक ट्रांसफ़र के रिकॉर्ड
- वादे दिखाने वाले मैसेज, ईमेल, WhatsApp चैट
- गवाहों के बयान
- बिज़नेस कार्ड या प्रचार सामग्री
- विज्ञापनों की फ़ोटो या स्क्रीनशॉट
ज़रूरी दस्तावेज़
- एफआईआर की कॉपी
- कानूनी नोटिस की कॉपी
- एग्रीमेंट या कॉन्ट्रैक्ट
- भुगतान दिखाने वाले बैंक स्टेटमेंट
- बातचीत का सबूत
- पहचान पत्र
शिकायत कहां करें
- पुलिस स्टेशन — धोखाधड़ी की एफआईआर
- साइबर क्राइम पोर्टल — अगर ऑनलाइन धोखाधड़ी है
- दीवानी अदालत — पैसे की वसूली का मुकदमा
- उपभोक्ता फ़ोरम — अगर मामला सामान/सेवा से जुड़ा है
- आर्थिक अपराध शाखा — बड़ी वित्तीय धोखाधड़ी के लिए
लागू कानून
- BNS धारा 318 — धोखाधड़ी
- BNS धारा 319 — प्रतिरूपण द्वारा धोखाधड़ी
- BNS धारा 316 — आपराधिक विश्वासघात
- BNS धारा 308 — जबरन वसूली (अगर धमकी दी गई हो)
मामले को समझें
भारतीय कानून में धोखाधड़ी का मतलब है झूठे वादों या गलत जानकारी देकर किसी को धोखा देना और पैसा, संपत्ति या फ़ायदा हासिल करना। इसमें निवेश धोखाधड़ी, नौकरी धोखाधड़ी, शादी के नाम पर धोखाधड़ी और नकली सौदे शामिल हैं। आपराधिक विश्वासघात तब लागू होता है, जब जिस व्यक्ति को आपका पैसा या संपत्ति सौंपी गई हो, वह उसका दुरुपयोग करे। आप आपराधिक (एफआईआर) और दीवानी (पैसे की वसूली), दोनों तरह के केस दायर कर सकते हैं।
वकील से कब मिलें
अगर रकम बड़ी है, पुलिस एफआईआर दर्ज करने से मना करती है, या आपको दीवानी वसूली का मुकदमा दायर करना है, तो वकील से सलाह लें। वकील आपराधिक और दीवानी, दोनों कार्यवाहियों में मदद कर सकता है।