अस्पताल आपातकालीन इलाज से मना कर रहा है
कोई अस्पताल आपातकाल में मरीज़ का इलाज करने से मना कर रहा है
अभी यह करें
- 01साफ़ कहें: 'यह मेडिकल इमरजेंसी है — मरीज़ की हालत स्थिर करना आपकी कानूनी ज़िम्मेदारी है'
- 02कोई भी अस्पताल — सरकारी या निजी — आपातकालीन इलाज से मना नहीं कर सकता। यह सर्वोच्च न्यायालय का आदेश है
- 03अस्पताल फिर भी मना करे तो 112 पर कॉल करें — पुलिस उन्हें इलाज करने के लिए बाध्य कर सकती है
- 04अस्पताल के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट या ड्यूटी डॉक्टर से बात करने को कहें
- 05इलाज से मना करने की फ़ोटो/वीडियो लें और मना करने वाले स्टाफ़ के नाम नोट करें
- 06अस्पताल के ख़िलाफ़ राज्य मेडिकल काउंसिल में शिकायत दर्ज करें
- 07ज़िला स्वास्थ्य प्राधिकरण और राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (1915) पर शिकायत दर्ज करें
यह बिल्कुल न करें
- मरीज़ की हालत को आपातकालीन रूप से स्थिर करवाए बिना अस्पताल न छोड़ें
- 'बेड ख़ाली नहीं है' को आपातकालीन इलाज से मना करने का कारण न मानें
- दबाव में किसी सहमति फ़ॉर्म पर हस्ताक्षर न करें — पहले पढ़ें या किसी से पढ़वाएं
- इलाज से मना करने का सबूत न खोएं — शिकायत के लिए इसकी ज़रूरत पड़ेगी
यह कानूनी जानकारी है, कानूनी सलाह नहीं। अपने मामले के लिए योग्य वकील से सलाह लें।